
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
उत्तराखंड से सड़क निर्माण में गुणवत्ता को लेकर एक अहम खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राना चट्टी से दांगुड़ गांव, पिंडकी, मदेश और निशनी मोटर मार्ग पर हो रहे डामरीकरण के कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा और मिट्टी के ऊपर ही डामर बिछाया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर निर्माण कार्य की निगरानी कौन कर रहा है और सरकारी धन के इस्तेमाल की जिम्मेदारी किसकी है?
तस्वीरों में दिखाई दे रहे सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग उठ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर और टिकाऊ सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी हो रही है, तो सड़क की मजबूती और उसकी उम्र पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। सवाल संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे हैं।
आखिर सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई है या नहीं? क्या डामरीकरण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया है?
जनता की मांग है कि संबंधित विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएं। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल, इस सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग का पक्ष और तकनीकी जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण सड़क कब तक मिल पाती है।



