संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र में पेट्रोल पंप निर्माण पर रोक, प्रशासन ने जताई गंभीर चिंता
Construction of petrol pumps banned in landslide-prone areas; authorities express serious concern.

संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र में पेट्रोल पंप निर्माण पर रोक, प्रशासन ने जताई गंभीर चिंता
नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर सात के सरुखेत, एनएच रोड पर निर्माणाधीन पेट्रोल पंप अब विवादों के घेरे में आ गया है। आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील इस क्षेत्र में पेट्रोल पंप के लिए की जा रही खुदाई से न सिर्फ चक्रगांव बल्कि आसपास के कई हेक्टेयर भूमि पर भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पेट्रोल पंप निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि वर्ष 2010 में आई भीषण आपदा के दौरान वार्ड नंबर सात को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और आपदा सचिव ने हवाई सर्वे कर हालात का जायजा लिया था। इसके बाद भूगर्भ विभाग के विशेषज्ञों ने मनोहर कॉम्प्लेक्स से प्रियंका लॉज, सरुखेत तक के पूरे क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील घोषित करते हुए निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। बावजूद इसके, कुछ वर्षों बाद क्षेत्र में फिर से निर्माण गतिविधियां तेज हो गईं।

यदि पेट्रोल पंप निर्माण की बात करें तो बीते दो वर्षों से यहां भूमि समतलीकरण का कार्य चल रहा है। इस दौरान कई बार आरसीसी से बनी सुरक्षात्मक दीवार ढह चुकी है, जिससे चक्रगांव के काश्तकारों की कृषि भूमि भूस्खलन की चपेट में आ गई। इससे नाराज ग्रामीणों—जनक सिंह राणा, कुशदेव राणा, सचेन्द्र सिंह सहित अन्य—ने उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए भूस्खलन क्षेत्र में पेट्रोल पंप निर्माण पर आपत्ति जताई और क्षतिग्रस्त खेतों को ठीक कराए जाने की मांग की।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने बताया कि मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि भूस्खलन से क्षतिग्रस्त भूमि का उचित ट्रीटमेंट नहीं किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए तकनीकी जांच पूरी होने तक पेट्रोल पंप निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी बड़ी आपदा से बचा जा सके।



